भागवत श्रवण से दिशा मिलती है एवं दिशा मिलने से दशा सुधरती है ।
गिरिराज परमार्थ सेवा ट्रस्ट की स्थपना सन २००६ में सरल,हृडय, मिरदभासी एवं सेवा भावी श्री भगवती प्रसाद जी केडिया,कलकत्ता निवासी दुआरा जन-साधारण को सेवा प्रदान करने हेतु की गयी जिसका एक मात्र उदेश है श्रद्धा,समपर्ण एवं सेवा| भारत एक ऐसी भूमि है जो की धार्मिक मान्यतो के अनुसार ३६ करोड़ देवी देवताओ की लीला चल रही है| जहाँ पर कहीं न कहीं इन देवी-देवताओ के मंदिर या उनके पूजनीय स्थल इस धरा पर स्थित है जहाँ सभी अपनी आस्था एवं श्रद्धा अनुसार दर्शन -पूजन हेतु समय समय पर वहां जरूर आते जाते है | इन समस्त स्थलों तक तीर्थटन के दुआरा श्री मद्रभगवत के माध्यम से दर्शन कराते हुए भगवन श्री कृष्ण की लीलाओ को जन-मानस तक पहुँचाने का प्रयास करते हुए अध्यातत्मिक लाभ उर्यजन एवं सेवा प्रदान करना ही ट्रस्ट का मुख्य उदेश है | उपरिक्त के आलावा जन हिताय , जन-सुखाये हेतु तृत-स्थलों में सेवा - सदन की स्थापना,असहाय एवं जिसको की सहायता, गरीबो को भोजन, वस्त्र एवं दवाइयों का वितरण,स्कूली बच्चो में कॉपी किताब वितरण तथा विद्यार्थिओं को स्कॉलरशिप प्रदान सम्लित है |

भगवान श्री कृष्ण ने इन्द्र्र के प्रकोप से भक्तो को बचाने हेतु पर्वत को ऊँगली पर धारण कर लिया था जिससे उनका नाम गिरिराज हुआ| तभी से समस्त भक्तो को यहा विस्वास हो गया कि जिन भक्तो के कष्ट निवारण हेतु इतना विशाल पहाड़ सिर्फ ऊँगली पर उठ सकता है तो उनके नाम का अगर स्मरण एवं जाप किया जावे तो मानव जीवन में गिरिराज कृपा से कास्ट रुपी पहाड़ कभी भी नहीं टूटेगा एवं इसी सूच के साथ की हमेशा यहाँ नाम मुख से उच्चारण होता रहे, इनका नाम गिरिराज परमार्थ सेवा ट्रस्ट रखा गया|
                               "जय जय श्री राधे"              सेक्रेटरी
Shri Madbhagwat Katha Mahotsav,
Date : 8th May to 14th May, 2014
Place : Vrindavan
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